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आज का शब्द: वेतन और केदारनाथ सिंह की कविता 'बिजली चमकी, पानी गिरने का डर है'

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                            हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है वेतन जिसका अर्थ है 1. नियत समय पर दिया जाने वाला पारिश्रमिक; मासिक आय; पगार 2. आजीविका; रोज़ी। कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
                                                                                                


बिजली चमकी, पानी गिरने का डर है
वे क्यों भागे जाते हैं जिनके घर है
वे क्यों चुप हैं जिनको आती है भाषा
वह क्या है जो दिखता है धुँआ-धुआँ सा
वह क्या है हरा-हरा-सा जिसके आगे
हैं उलझ गए जीने के सारे धागे
यह शहर कि जिसमें रहती है इच्छाएँ
कुत्ते भुनगे आदमी गिलहरी गाएँ
यह शहर कि जिसकी ज़िद है सीधी-सादी
ज्यादा-से-ज्यादा सुख सुविधा आज़ादी
तुम कभी देखना इसे सुलगते क्षण में
यह अलग-अलग दिखता है हर दर्पण में
साथियो! रात आई, अब मैं जाता हूँ
इस आने-जाने का वेतन पाता हूँ
जब आँख लगे तो सुनना धीरे-धीरे
किस तरह रात-भर बजती हैं ज़ंजीरें
2 months ago

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