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आज का शब्द: नवनिधि और सुनीता पाण्डेय 'सुरभि' की  कविता- अजब लगा यह रोग है

आज का शब्द
                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- नवनिधि, जिसका अर्थ है- धन के देवता कुबेर की नौ निधियां, पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुन्द, कुन्द, नील और खर्व। प्रस्तुत है सुनीता पाण्डेय 'सुरभि' की कविता- अजब लगा यह रोग है- 
                                                                                                


लोभी हूँ मैं, सुनो सखी री, 
अजब लगा यह रोग है। 
लोभ, सजन के घर जाने का, 
बोलो! कब संयोग है। 

लोभ नहीं है रंगमहल का, 
कुटिया में रह लूँगी मैं। 
कनक करधनी, बिना नौलखा, 
प्रीतम को गह लूँगी मैं। 
प्रीत पगे साजन के बयना-
मेरा छप्पन भोग है। 
लोभी हूँ मैं, सुनो सखी री, 
अजब लगा यह रोग है। 

लोभ एक ही शेष बचा है, 
साजन के घर जाने का। 
आलिंगन में लेकर उनको, 
सारी उमर रिझाने का। 
बिन साजन के, सच कहती हूँ-
जीवन मेरा जोग है। 
लोभी हूँ मैं, सुनो सखी री, 
अजब लगा यह रोग है।  आगे पढ़ें

2 months ago

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