आज का शब्द: मधुप और जयशंकर प्रसाद की कविता आत्मकथ्य

aaj ka shabd madhup jaishankar prasad hindi kavita
                                

हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है 'मधुप' जिसका अर्थ है मधु पीने वाला, मधुमक्खी या भ्रमर। इस शब्द का प्रयोग कवि जयशंकर प्रसाद ने अपनी कविता में यूं किया है। 

मधुप गुन-गुनाकर कह जाता कौन कहानी अपनी यह,
मुरझाकर गिर रहीं पत्तियां देखो कितनी आज घनी।
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में असंख्य जीवन-इतिहास
यह लो, करते ही रहते हैं अपने व्यंग्य मलिन उपहास
तब भी कहते हो-कह डालूं दुर्बलता अपनी बीती,
तुम सुनकर सुख पाओगे, देखोगे-यह गागर रीती।

किंतु कहीं ऐसा न हो कि तुम ही खाली करने वाले
अपने को समझो, मेरा रस ले अपनी भरने वाले।
यह विडंबना! अरी सरलते हंसी तेरी उड़ाऊं मैं
भूलें अपनी या प्रवंचना औरों की दिखलाऊं मैं।
उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊं, मधुर चांदनी रातों की,
अरे खिल-खिलाकर हंसने वाली उन बातों की।

मिला कहां वह सुख जिसका मैं स्वप्न देकर जाग गया,
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
जिसके अरूण-कपोलों की मतवाली सुन्दर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की।
सीवन को उधेड़ कर देखोगे क्यों मेरी कंथा की?

छोटे से जीवन की कैसे बड़े कथाएँ आज कहूं?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूं?
सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्मकथा?
अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।

1 week ago
Comments
X