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आज का शब्द: दयानिधान और लीलाधर जगूड़ी की कविता- दबे हुए फूटकर बँधे हुए जैसे छूटकर

आज का शब्द
                
                                                                                 
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला मे आज का शब्द है- दयानिधान, जिसका अर्थ है- ईश्वर या बहुत दयालु पुरुष। प्रस्तुत है लीलाधर जगूड़ी की कविता- दबे हुए फूटकर बँधे हुए जैसे छूटकर 
                                                                                                


वसंत आया तमतमाया
खून खौलाया
इतनी सारी लाशों के बीच वसंत आया

दबे हुए फूटकर बँधे हुए जैसे छूटकर
जोड़-तोड़वाले जैसे पूरी तरह टूटकर निकले
पत्तों से भरा पेड़ झन्नाया
इतनी सारी लाशों के बीच वसंत आया

वह भी आया जो मँजा हुआ था
वह भी अँजा हुआ था जिसकी आँखों में
राजनीति का कीच
इतनी सारी लाशों के बीच

हरियाली दहाड़ती आयी चीखती नहीं
फाड़ती आयी ऊसर बंजर और अकाल का
मुँह धो बाल काढ़ती आयी
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2 months ago

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