आज का शब्द: अस्ति और माखनलाल चतुर्वेदी की हिंदी कविता

aaj ka shabd asti makhan lal chaturvedi hindi kavita
                                हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है अस्ति जिसका अर्थ है  1. वर्तमान होने की अवस्था या भाव 2. सत्ता, विद्यमानता। कवि माखनलाल चतुर्वदी ने अपनी इस कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

गगन पर दो सितारे: एक तुम हो,
धरा पर दो चरण हैं: एक तुम हो,
‘त्रिवेणी’ दो नदी हैं! एक तुम हो,
हिमालय दो शिखर है: एक तुम हो,
रहे साक्षी लहरता सिंधु मेरा,
कि भारत हो धरा का बिंदु मेरा।

कला के जोड़-सी जग-गुत्थियां ये,
हृदय के होड़-सी दृढ वृत्तियां ये,
तिरंगे की तरंगों पर चढ़ाते,
कि शत-शत ज्वार तेरे पास आते।

तुझे सौगंध है घनश्याम की आ,
तुझे सौगंध भारत-धाम की आ,
तुझे सौगंध सेवा-ग्राम की आ,
कि आ, आकर उजड़तों को बचा, आ।

तुम्हारी यातनाएं और अणिमा,
तुम्हारी कल्पनाएं और लघिमा,
तुम्हारी गगन-भेदी गूंज, गरिमा,
तुम्हारे बोल! भू की दिव्य महिमा

तुम्हारी जीभ के पैंरो महावर,
तुम्हारी अस्ति पर दो युग निछावर।
रहे मन-भेद तेरा और मेरा, अमर हो देश का कल का सबेरा,
कि वह कश्मीर, वह नेपाल; गोवा;
कि साक्षी वह जवाहर, यह विनोबा,
प्रलय की आह युग है, वाह तुम हो,
जरा-से किंतु लापरवाह तुम हो।
6 days ago
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