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 shabana azmi on his father kaifi azmi in amar ujala kavya

मुड़ मुड़ के देखता हूं

शबाना आजमी की नजर में उनके अब्बा कैफी आजमी...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वो कभी दूसरों जैसे थे ही नहीं, लेकिन बचपन में ये बात मेरे नन्हे से दिमाग में समाती नहीं थी...न तो वो आफिस जाते थे, न अंग्रेजी बोलते थे और न दूसरों के डैडी और पापा की तरह पैन्ट और शर्ट पहनते थे-सिर्फ सफेद कुर्ता-पाजामा। वो डैडी या पापा के बजाय अब्बा थे-ये नाम भी सबसे अलग ही था-मैं स्कूल में अपने दोस्तों से उनके बारे में बात करते कुछ कतराती ही थी-झूट-मूट कह देती थी-वो कुछ बिजनेस करते हैं-वर्ना सोचिए, क्या यह कहती कि मेरे अब्बा शायर हैं? शायर होने का क्या मतलब? यहीं न कि कुछ काम नहीं करते। आगे पढ़ें

वहीं बच्चे दाखिला पा सकते हैं जिनके मां-बाप को अंग्रेजी आती हो...

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