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शैलेश मटियानी की 3 कविताएं 

साहित्य
                
                                                                                 
                            शैलेश मटियानी का मूल नाम रमेश चंद्र मटियानी था, लेकिन मशहूर हुए शैलेश मटियानी के नाम से ही। शैलेश हिंदी साहित्य जगत में नई कहानी विधा के अग्रणी कथाकार थे। उन्होंने कविताएं भी लिखी हैं। जनकवि बाबा नागार्जुन उन्हें 'हिंदी का गोर्की' कहते थे। शैलेश मटियानी का जन्म उत्तराखण्ड राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र के अन्तर्गत अल्मोड़ा जिले के बाड़ेछीना नामक गाँव में 14 अक्टूबर 1931 में हुआ था। 1950 से ही उन्होंने कविताएँ और कहानियाँ लिखनी शुरू कर दी थीं। शुरू में वे रमेश मटियानी 'शैलेश' नाम से लिखते थे। उनकी आरंभिक कहानियाँ 'रंगमहल' और 'अमर कहानी' पत्रिका में प्रकाशित हुई। उन्होंने 'बोरीवली से बोरीबन्दर' तथा 'मुठभेड़', जैसे उपन्यास, चील, अर्धांगिनी जैसी कहानियों के साथ ही अनेक निबंध तथा प्रेरणादायक संस्मरण भी लिखे हैं। 24 अप्रैल 2001 को उनका निधन हुआ। प्रस्तुत है शैलेश मटियानी की कविता 3 कविताएं- 
                                                                                                


गीत को
उगते हुए
सूरज-सरीखे छंद दो
शौर्य को फिर
शत्रु की
हुंकार का अनुबंध दो ।

प्राण रहते
तो न देंगे
भूमि तिल-भर देश की
फिर
भुजाओं को नए
संकल्प-रक्षाबंध दो ! आगे पढ़ें

9 months ago

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