हर रचनाकार एक पौधे की तरह है उसकी रचनाएं उसी का प्रतिफलन होती हैं - कुंवर बेचैन

kunwar bechain interview series 1
                
                                                             
                            

जब कभी शायरी, कविताओं या गीत की बात चलती है। एक नाम मुख्यतः ज़हन में उभरकर आता है और वह नाम है डॉ. कुंवर बेचैन का। डॉ. बेचैन ने साहित्य को अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। निरंतर लेखन में लगे रहने के साथ-साथ मंचों पर भी उनकी सक्रियता देखते ही बनती थी। डॉ.बेचैन को साहित्य-क्षेत्र के सुधीजन एक 'साहित्य-संस्थान' या' साहित्य का विश्वविद्यालय' कहते हैं और वह इसलिए क्योंकि बेचैन ने साहित्यकारों की एक पूरी पीढ़ी तैयार की है। एक ऐसे विराट व्यक्तित्व जिन्होंने 24 देशों के शहरों में काव्य-पाठ कर के साहित्यिक दृष्टि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के मस्तक को गौरवान्वित किया है। 
हाल ही में कोरोना से जूझते हुए उनका निधन हो गया।

इससे पहले वह अपने एक साक्षात्कार में कई अनछुए पहलुओं को सामने रख गए। इस साक्षात्कार को डॉ. अल्पना सुहासिनी ने लिया है। 

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2 months ago

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