गीत चतुर्वेदी की किताब 'अधूरी चीज़ों का देवता' से डायरी के फुटकर पन्ने

geet chaturvedi diary ke footkar panne
                
                                                             
                            1. जिसकी अनुपस्थिति में भी तुम जिससे मानसिक संवाद करते हो, उसके साथ तुम्हारा प्रेम होना तय है। भले वह सौ साल पहले क्यों न मर चुका हो। यह तुम्हारे ह्रदय की नहीं. संसार के बनावट की सीमा है कि तुम उससे कभी मिल न पाओ।
                                                                     
                            
प्रेम अलग शै है, प्रेम की अभिव्यक्तियां निहायत अलग
क़तई ज़रूरी नहीं कि तुम्हारे हिस्से दोनों आएं।

2. कुछ लोग रोना रोकते हैं, बेहिसाब रोकते हैं। इसलिए नहीं कि वे मजबूत होते हैं, बल्कि इसलिए कि उनके आसपास कमज़ोर कंधों का कारवां होता है।

3. इतना पवित्र है तुम्हारा कंठ कि वहां प्रार्थनाओं को नहीं, प्रेम की गीतों को रहनी चाहिए।

4. प्रेमी ले कुछ छिपा ले जाना राजनीति है
प्रिय कवियों की सूची बनाना राजनीति है
जो प्रेम मैं तुमसे कर चुका हूं, उसे तुम भी अब छीन नहीं सकती
इस पंक्ति का उच्चारण करना राजनीति है

5. बहुत थे लोग, मैंने उन्हें नहीं देखा
बहुत था दुख, दरिया में बहा न पाया
बहुत था प्रेम, पूरा नहीं दे पाया
बहुत था जीवन, उसे एक ही क्यों माना ?

6. एक व्यक्ति ने लिखा : पीड़ा। दूसरे ने उसे पढ़ा : सौंदर्यशास्त्र।
एक ही शब्द दो लोगों के लिए कितना अलग-अलग होता है। 
1 month ago
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