विज्ञापन

बिमल सहगल का लेख 'कंक्रीट जंगल-जाल में फंसे असहाय पंछी'

Bimal Saigal write up on helpless birds
                
                                                                                 
                            

आसमान की गहराइयों को उन्मुक्त नापते पक्षियों को देख और पेड़ों की शाखाओं पर बैठे उन्हें चहचहाते सुन किसका मन खुशी से नहीं खिल जाता? दुर्भाग्यवश, बहुत लोग चाव से उन्हें घर में  पिंजरे में कैद कर पालते भी हैं। तोता-मैना जैसे पक्षियों से तो हम बड़े प्यार से बातें करते हैं और उनसे घर के सदस्य जैसा व्यवहार भी करते हैं। पर ज्यों ही कोई बेघर कबूतर का जोड़ा अपना घर बसाने हमारी बालकनी या आँगन में चला आता है तो उसे तुररन्त भगाने को तत्पर रहते हैं। बालकनियों को जाल से ढक कर उनसे बचते हैं। इस साल की रिकॉर्ड तोड़ती गर्मी ने उनके इस अंडे देने के मौसम में उन्हें परिवार बड़ाने का कोई उचित ठिकाना ढूंढ़ने की कठिनाई के अलावा खुद के लिए इस गर्मी की मार से बचने व दाना-पानी जुटा जीवित रहने की समस्या भी पैदा हो गई है। ऐसे में ज़रूरत है कि अपने वातानुकूलित घरों में आराम से बैठे हम मानव द्वारा इन अपने प्राकृतिक आवासों से निर्वासित जीवों का भी सोचें और उनके प्रति सहानुभूति दिखाएँ।



मुझे याद है, महाराष्ट्र राज्य के कोल्हापुर जिले के एक बूढ़े किसान के बारे में कुछ साल पहले छपा पक्षियों के प्रति उसकी संवेदना का एक समाचार काफी प्रेरणादायक और हृदय को छू जाने वाला था। वह किसान उन सैंकड़ों साथियों में से एक था जिन्होंने मानसून की विफलता से आयी सूखे की स्थिति में अपनी फसल खो आर्थिक नुकसान उठाया था और खुद खाने-पीने को मोहताज हो गए थे; फिर भी वह अकेला ऐसा था जिसने अपनी दयनीय अवस्था  के बावजूद, सूखे से प्रभावित दूसरों की दुर्दशा के बारे में सोचा और अपने तबाह हुए ज्वार के खेत से जो थोड़ी-बहुत उपज बची थी, उसे खेत में ही छोड़ दिया ताकि वह उस से अधिक ज़रूरतमंदों जीवों के काम आ सके। उस भयंकर सूखे से जैसे-जैसे खड़ी फसलें तबाह होने लगी और खेतों के आस-पास के सभी जलाशय सूखने लगे, इन विरोधी हालातों के चलते. अधिकतर खेतों की उपज पर ही निर्भर, गांव के आस-पास के क्षेत्रों में पेड़ों पर घोंसले बनाने वाले पक्षियों को भी अनदेखी आपदाओं का सामना करना पड़ा। सहज उपलब्ध अनाज व पानी के अभाव में न केवल उनका अपना अस्तित्व खतरे में पड़ा बल्कि घोंसलों में अंडों के अंदर पनपती नयी ज़िंदगियों की अकाल समाप्ति भी निश्चित लगने लगी। इन दुखद संभावनाओं से आशंकित हो अपने खेत के आस-पास के इलाके के पक्षियों के  प्रति सहानुभूति रखते हुए, उस बूड़े किसान ने अपनी पूरी खड़ी फसल उनको समर्पित कर दी।

आगे पढ़ें

2 months ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X