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लेखक के अलावा गोपी चंद नारंग बहुत अच्छे वक्ता भी थे

साहित्य
                
                                                                                 
                            उर्दू के मशहूर साहित्यकार गोपी चंद नारंग का निधन हो गया है। 91 वर्षीय नारंग ने अमेरिका में अंतिम सांस ली। नारंग का जन्म 1931 में बलूचिस्तान में हुआ था। तकरीबन 57 किताबों के लेखक गोपी चंद नारंग को पद्म भूषण और साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी अलंकृत किया जा चुका है।  इनके द्वारा रचित एक समालोचना 'साख्तियात पस–साख्तियात' और 'मशरीक़ी शेरियात' के लिए उन्हें सन् 1994 में साहित्य अकादमी पुरस्कार (उर्दू) से सम्मानित किया गया। 
                                                                                                


नारंग साहब ने दिल्ली के सेंट स्टीवंस कॉलेज से अध्यापन की शुरुआत की थी।  वे देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों में उर्दू पढ़ा चुके हैं। उर्दू को धर्म विशेष से जोड़कर देखे जाने के सख़्त विरोधी थे।

गोपीचंद नारंग की करीब 57 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इनमें से अधिकतर उर्दू में हैं। उन्होंने कुछ किताबें हिंदी और अंग्रेजी में भी लिखी हैं। वह उर्दू के अलावा छह अन्य भारतीय भाषाएं भी जानते हैं।लेखक के अलावा नारंग बहुत अच्छे वक्ता भी थे। पद्मभूषण के अलावा नारंग को पाकिस्तान के भी तीसरे सर्वोच्च अलंकरण 'सितार ए इम्तियाज' से विभूषित किया जा चुका है।

उन्होंने 1954 में दिल्ली विश्वविद्यालय से उर्दू में परास्नातक करने के बाद शिक्षा मंत्रालय से स्कॉलरशिप लेकर 1958 में अपनी पीएचडी पूरी की। प्रो. नारंग ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में उर्दू साहित्य पढ़ाना शुरू किया। कुछ समय बाद वह दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग से जुड़ गए। यहां 1961 में वह रीडर हो गए।  आगे पढ़ें

5 months ago

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