आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Raskhan here with poem of truth and love   
रसखान के दोहे

काव्य

ब्रज भाषा विशेष: रसखान के ये हैं प्रसिद्ध दोहे...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1826 Views
रसखान के दोहे, सवैया, कवित्त और छंद ने ब्रज भाषा के साहित्य को विपुल संस्कार दिए हैं। कृष्ण प्रेम ने उन्हें भक्ति कवि का दर्जा दिलाया। ब्रज क्षेत्र में रसखान ने कृष्ण नाम की आध्यात्मिक धारा बहाई। रसखान की कृष्ण संबंधी उपमाएं आज भी बड़ी श्रद्धा भाव के साथ पढ़ी जाती हैं। रसखान के कुछ दोहे काफी प्रसिद्ध हैं। जो इस प्रकार हैं...  

प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोइ।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोइ॥

कमल तंतु सो छीन अरु, कठिन खड़ग की धार।
अति सूधो टढ़ौ बहुरि, प्रेमपंथ अनिवार॥
  आगे पढ़ें

इन सबहीं ते प्रेम है, परे कहत मुनिवर्य...

सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!