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Qateel shifai ghazal dard se mera daaman bhar de by jagjit singh

मुड़ मुड़ के देखता हूं

क़तील शिफ़ाई की ग़ज़ल गाते हुए रोने लगे थे जगजीत सिंह और फिर ऐसी ख़बर आयी

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जगजीत सिंह की देह भले ही आज हमारे बीच मौजूद नहीं है लेकिन उनकी आवाज़ की खनक सदियों तक के लिए है। उनकी गायकी में हर वो कशिश थी कि लोग सहजता से उन्हें घंटों सुन सकते थे। विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों पर उनके वीडियो से उनकी मौजूदगी को महसूस किया जा सकता है।

जगजीत सिंह को ग़ज़ल-सम्राट कहा जाता है। उन्होंने ग़ालिब से लेकर क़तील शिफ़ाई, कैफ़ी आज़मी और शिव कुमार बटालवी के पंजाबी गीतों तक सभी को अपनी आवाज़ दी। उन्होंने जो भी ग़ज़ल गायी उसी के साथ उनका नाम उतना ही चस्पा हो गया जितना कि उस ग़ज़ल को लिखने वाले का।

जिस अंदाज़ में उनकी आवाज़ के स्वर निकले उसी एहसास के साथ लोगों ने उन ग़ज़लों को अपना लिया। जगजीत की आवाज़ से पंजाबी टप्पों की चहक निकली तो 'होश वालों को ख़बर क्या' से मुहब्बत के संजीदा एहसास भी। उनकी उदास ग़ज़लों को सुनकर लोग रोने लगते थे। लेकिन एक किस्सा ऐसा भी है जब एक कार्यक्रम में ग़ज़ल गाते हुए ख़ुद ग़ज़ल-सम्राट ही रोने लगे थे।  आगे पढ़ें

किस्सा यूं था कि

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