परवीन शाकिर - जब एक लिखित परीक्षा में स्वयं पर ही पूछा गया था सवाल

Parveen shakir a famous shayara
                
                                                             
                            परवीन शाकिर ने 1982 में सेंट्रल सुपीरियर सर्विस की परीक्षा दी थी। जिसमें एक सवाल स्वयं उन्हीं पर पूछा गया था जिसे देखकर वह बेहद भावुक हो गयी थीं। 
                                                                     
                            

परवीन शाकिर उर्दू अदब की सफ़ों में सबसे आगे नज़र आती हैं। एक ऐसी शायरा जिन्होंने औरत के ज़हन को अपनी शायरी में तब्दील कर दिया। उन्होंने मोहब्ब्त में जितना डूब कर लिखा उतनी ही शिद्दत से हिज्र के ग़म में भी लिखा। उन्होंने एक प्रेमिका के एहसास कहे

बहुत से लोग थे मेहमान मेरे घर लेकिन
वो जानता था कि है एहतिमाम किस के लिए

तो एक पत्नी के तौर पर कहा कि

यही वो दिन थे जब इक दूसरे को पाया था
हमारी साल-गिरह ठीक अब के माह में है

वहीं उन्होंने अपने बेटे के लिए भी नज़्म कही जिसमें वह कहती हैं कि उसे यह ग़म न रहे कि वह एक शायरा का बेटा है बजाए एक पिता का बेटा होने के।  आगे पढ़ें

2 months ago

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