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Letters of Ghalib

मुड़ मुड़ के देखता हूं

रवायतों को बदलते ग़ालिब के ख़ुतूत - 2

दीपाली अग्रवाल काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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यह है मिर्ज़ा ग़ालिब के ख़तों की दूसरी किश्त

मुंशी हरगोपाल तफ़्ता ग़ालिब के चहेते शिष्य थे और कल की किश्त में जिक्र था कि मिर्ज़ा साहब ने मुंशी जी को शिकायती लहज़े में ख़त लिखा था कि उन्होंने ग़ालिब को बहुत वक्त से कोई ख़त नहीं लिखा है। यह ख़त 27 दिसम्बर को लिखा गया था, यानी कि साल के आख़िरी दिनों में, इसके बाद मुंशी जी का जवाब मिला और उस जवाब पर मिर्ज़ा साहब ने एक कमाल का ख़त उन्हें लिखा। 

मिर्ज़ा साहब लिखते हैं कि  आगे पढ़ें

1858 के ख़त का जवाब 1859 में भेजते हो...

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