आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mud Mud Ke Dekhta Hu ›   letter of premchand to his wife Shivrani
letter of premchand to his wife Shivrani

मुड़ मुड़ के देखता हूं

पढ़ें प्रेमचंद का पत्र पत्नी शिवरानी के नाम

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

701 Views
जिस समय प्रेमचंद ने यह पत्र लिखा, शिवरानी अपने किसी संबंधी के घर गई हुई थीं। कुछ दिनों का यह बिछोह भी प्रेमचंद जी को सहन नहीं हुआ।

प्रिय रानी,

मैं तुम्हें छोड़कर काशी आया, मगर यहां तुम्हारे बिना सूना-सूना लग रहा है। क्या कहूं? तुम्हारी बहन की बात कैसे मानता? न मानने पर तुम्हें भी बुरा लगता। जिस समय तुम्हें उन्होंने रोका, मैं जी मसोसकर रह गया। तुम तो अपनी बहन के यहां ख़ुश होगी, मगर मैं यहां परेशान हूं; जैसे एक घोंसले में दो पक्षी रह रहे हों और उनमें से एक के न रहने पर दूसरा परेशान हो। तुम्हारा यही न्याय है कि तुम वहां मौज करो और मैं तुम्हारे नाम की माला फेरूं। तुम मेरे पास हो तो मैं भरसक कहीं जाने का नाम नहीं लेता। तुम आने का नाम नहीं लेतीं। मुझे 15 तारीख़ को प्रयाग यूनीवर्सिटी में बुलाया गया है। यही बात है कि मैं अभी तक नहीं आया, नहीं तो कभी का पहुंच गया होता। इसलिए मैं सब्र किए बैठा हूं। अब तुम 15 तारीख़ को आने के लिए तैयार रहना। सच कह रहा हूं घर मुझे खाए जा रहा है। कभी-कभी मैं यह सोचता हूं कि क्या सभी की तबीयत इसी तरह चिंतित हो जाती है या मेरी ही? 

तुम्हारे पास रुपये पहुंच गए होंगे। अपनी बहन को मेरी नमस्ते कहना। बच्चों को प्यार। कहीं ऐसा न हो कि इस पत्र के साथ ही मैं भी पहुंचूं। जवाब जल्दी लिखना।

तुम्हारा
धनपत 
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!