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कैफ़ भोपाली

मुड़ मुड़ के देखता हूं

सोचो ! भरी महफिल में कैफ़ साहब के कुर्ते पर पान खा कर थूक दिया, फिर निदा फाज़ली फ़रमाते हैं कि...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बिहार (अब झारखण्ड) के गिरीडीह में मुशायरा था। कैफ़ भोपाली साहब दस्तूर के मुताबिक मंच पर सबसे आगे बैठे थे और हर शायर को जहां बैठे थे, वहीं से एक फुट ऊपर उठकर दोनों हाथ आकाश की तरफ उठाकर और गर्दन हिला-हिलाकर दाद दे रहे थे।

मख़्मूर सईदी उनकी बैठक से 45 अंश के कोण में उनके पीछे अपनी धुन में सिगरेट पर सिगरेट फूंक रहे थे। मुशायरे में शाइरों के आवभगत का जिम्मा सनमाइका के एक बड़े व्यापारी के जिम्मे था। उसने शराब-कबाव के अलावा, सबको अच्छी तरह के ब्रांड के सिगरेट के पैकेट भी दिए थे। आगे पढ़ें

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