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अमिताभ-राखी

मुड़ मुड़ के देखता हूं

साहिर के अल्फाज़ ने यूं सजाया था 'कभी कभी' का रोमांस...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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कभी कभी फिल्म में अगर अमिताभ बच्चन पेड़ में छिपकर मोहब्बत करने वाले हसीन युवा लगते हैं तो इसके पीछे की मुख्य वजह साहिर का शायराना-सुहावना अंदाज है। गीत हो या संवाद फिल्म में अमिताभ के साथ-साथ साहिर भी बरक्स छाए हुए हैं। फिल्म में मोहब्बत में तन्हाई और जुदाई का गहरा एहसास साहिर के अल्फाजों की वजह से ही संभव हो पाया है। कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है गीत तो जैसे फिल्म को पूरी तरह बांधे हुए है। मन की मोहब्बत को जमाने के सामने शिद्दत से पेश करना भी एक अदा है। मोहब्बत से कोई अनजान नहीं है। गीतों, शायरी और शेरो के जरिए शायर समय समय पर मोहब्बत को हसीन ख्यालों के साथ सबके सामने रखते हैं। साहिर का रोमांटिक अंदाज 'कभी कभी' को मोहब्बत की नायाब तस्वीर बना देता है।  आगे पढ़ें

गुज़रने पाती तो शादाब हो भी सकती थी...

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