'इमरोज़ तुम मेरी ज़िंदगी की शाम में क्यों मिले, दोपहर में क्यों नहीं'

अमृता प्रीतम की प्रेम कहानी
                
                                                             
                            
अमृता प्रीतम ने अपनी आत्मकथा 'रसीदी टिकट' में साहिर लुधियानवी के अलावा अपने और इमरोज़ के बीच के आत्मिक रिश्तों को भी  बेहतरीन ढंग से क़लमबंद किया। इस किताब में अमृता ने अपनी ज़िंदगी कई परतों को खोलने की कोशिश की है। 

'रसीदी टिकट' में अमृता ख़ुद से जुड़े हुए कई ब्योरे यहां खुलकर बताती हैं। इमरोज़, अमृता की जिंदगी में आए तीसरे पुरुष थे। हालांकि वह पूरे जीवन साहिर से प्यार करती रहीं। अमृता कई बार इमरोज़ से कहतीं- "अजनबी तुम मुझे जिंदगी की शाम में क्यों मिले, मिलना था तो दोपहर में मिलते।" अमृता इमरोज़ से अक्सर इस तरह के सवाल पूछती थीं, क्योंकि इमरोज़ अमृता की ज़िंदगी में बहुत देर से आये थे। मगर वो दोनों एक ही घर में एक ही छत के नीचे दो अलग-अलग कमरे में रहते थे। 
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मैं रात को शांति में लिखती थीं, तब धीरे से इमरोज़ चाय रख जाते थे...

1 month ago

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