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Ek subah baarish ke baad

मेरे अल्फाज़

एक सुबह बारिश के बाद

Himanshu Gupta

3 कविताएं

12 Views
खिड़की पर बैठा मैँ,
अपलक निहारता चिड़िया के बच्चे की उड़ने
की कोशिशेँ,
नीचे दाना चुगती माँ,
खेलते हुए दो कबूतर..

बारी-बारी से सभी ओझल हुए आँखोँ से,
मैँ वहीँ पर बैठा अभी भी,
तुम्हारी बातेँ याद करता..

कि कहा था कभी तुमने,
बाद मेरे जो पसंद आए
चाहना उसे भी मेरे जितना ही,
तुम प्यार बड़ी शिदद्त से करते होँ..

मैँ अब भी खिड़की पर बैठा,
ख्यालोँ मेँ तुम्हारे,
कर बैठा प्यार आज की धूप से ...आखिर
वो भी तो तुम्हारी ही तरह,

आई थी कई रोज़ बाद..

March 16, 2013

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