मैंने अपनी कविता में प्रायः वही लिखा है, जो मेरी ठीक पकड़ में आया है: भवानी प्रसाद मिश्र 

भवानी प्रसाद मिश्र
                
                                                             
                            कोई भी अनचाहा, बेमन का काम करणीय नहीं होता। कवि और कविता के बारे में जितनी बातें कही और लिखी जाती हैं, उनके आसपास जो प्रकाश-मंडल खींचा जाता है और उन्हें जो रोजमर्रा मिलने वाले आदमियों और इनकी कृतियों से कुछ अलग स्वभाव, प्रेरणाओं और सामर्थ्यों की चीज माना जाता है, वैसा कम से कम अपने बारे में मुझे कभी नहीं लगा। हो सकता है कि मैं कवि ही न होऊं। पुराने कवि मैंने कम पढ़े, नए कवि जो मैंने पढ़े, मुझे जंचे नहीं।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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1 month ago

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