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best Waseem Barelvi Sher

मुड़ मुड़ के देखता हूं

जब वसीम बरेलवी के शेर में अप्रवासी को ज़िंदग़ी नज़र आने लगी...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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वसीम बरेलवी आज के समय के उर्दू के एक बहुत बड़े शायर हैं जिन्हें सभी पीढ़ियों की भरपूर मुहब्बत मिली है। उनका कहना है कि, “समय के साथ लोगों की सोच में तब्दीली आती है लेकिन मेरा शेरी रव्वैया जो शुरू से रहा था उसमें इस तरह की तब्दीली आती रहीं कि हर नस्ल मुझे अपनाती रही, जिस शायरी के आईने में लोगों ने मुझे 50 साल पहले देखा था उससे आज तक की नस्ल भी खुद को जोड़ पाती है।”
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बात 1988 की है...

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