आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Azeez Filmi Nagme ›   Womens day 2018 best lyrics of Sahir in film Sadhna
साधना

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

फिल्म साधना का मार्मिक गीत- औरत संसार की किस्मत है, फिर भी तकदीर की हेती है

रत्नेश मिश्र, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

1043 Views
औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया
जब जी चाहा कुचला मसला, जब जी चाहा दुत्कार दिया


1958 में बनी फिल्म 'साधना' के लिये यह गीत साहिर लुधियानवी ने लिखा। साहिर का जन्म 8 मार्च 1921 को हुआ था, और ठीक इसी दिन 1911 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन की शुरुआत हुई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की। साहिर इस दुनिया में इस शुरुआत के एक दशक बाद आते हैं। हजारों वर्षों की गैरबराबरी के ख़िलाफ महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक बराबरी के लिये यह एक बड़ी पहलकदमी थी। 

तुलती है कहीं दीनारों में, बिकती है कहीं बाजारों में
नंगी नचवाई जाती है, ऐय्याशों के दरबारों में
ये वो बेइज्जत चीज है जो, बंट जाती है इज्जतदारों में
आगे पढ़ें

औरत के लिये रोना भी खता

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!