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Khawahis sahil ki

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

ख्वाहिश साहिल की

Pulkitkavya Sarovar

4 कविताएं

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तेरी ओर मैं बढ़ चला,
तू कहां रुका हुआ!!
तेरी ओर बढ़ चला ...
तु कहीं रुका हुआ ||
हुआ धैर्य का इम्तिहान....
लगे तू छिपा हुआ !!
तेरी ओर मैं बढ़ चला,
तू कहां रुका हुआ!!

तुझे पाने का एहसास
होने ही लगा है अब मुझे,
ख़्वाहिश है छायी नजरों पे
विश्वास हो गया है अब मुझे |
सुबह की सुहानी सी किरण संग...
सूर्योदय भी अब. हुआ!!!!
अन्तर्मन के सभी तिमिर का ;
निराकरण भी अब हुआ ||

तेरी ओर मैं बढ़ चला,
तू कहां रुका हुआ!!
तेरी ओर बढ़ चला ...
तु कहीं रुका हुआ ||
हुआ. धैर्य का इम्तिहान....
लगे. तू. छिपा. हुआ !!

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