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flashback of Aaj Mausam Bada Beimaan Hai song

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

'आज मौसम बड़ा बेईमान है...' मौसम को देख इश्क़ मचल उठता है

मोहम्मद अकरम / अमर उजाला, नई दिल्ली

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कहते हैं कि ख़ूबसूरत मन हो, तो दुनिया की हर चीज़ नायाब और बेशक़ीमती लगती है। इसी तरह अगर ख़ुशगवार मन से आसमान की ओर निगाह करें, तो यक़ीनन आप बरबस कह उठेंगे कि आज मौसम बड़ा सुहावना है। लेकिन आप आशिक़ या माशूक़ हैं तो उस मौसम में आपको हसीन और रूमानियत की दिल फ़रेब हवाएं महसूस होंगी। यही हवाएं मुझे यह नग़मा सुनते वक़्त भी महसूस होती हैं। इस नग़मे के बोल इशक़ करने वालों की नज़रों से मौसम को कुछ यू बयां करते हैं... 

'आज मौसम बड़ा बेईमान है
बड़ा बेईमान है, आज मौसम
आने वाला कोई तूफ़ान है
कोई तूफ़ान है, आज मौसम'


फ़िल्म 'लोफ़र' के इस गीत के बोल उस हसीन मौसम की याद को फिर ताज़ा कर देते हैं। जब मैं उससे पहली बार मिला था। उस वक़्त न गर्मी थी और न ही ज़्यादा सर्दी। रुक-रुककर हवाएं चल रही थीं और आसमान में बादल बरसने को बेचैन थे। वो सुनहरा मंज़र यादों के आशियाने में आज भी ताज़ा है।

इस नग़मे में दो प्यार करने वालों की हिचक और झिझक को भी बहुत ख़ूबसूरती से फ़िल्माया गया है। इस गाने के  बोल और फ़िल्मांकन में एक निराला तालमेल है। यह गाना धर्मेंद्र के एक निगाह आसमान की ओर देखने के बाद शुरू होता है। नज़रें नीची करने के बाद जब वह मुमताज़ की तरफ़ देखते हैं, तो मुमताज़ हाथ छुड़ाकर शर्माती-लजाती दो क़दम आगे बढ़ जाती हैं। यह पूरा गाना बेईमान मौसम में दो दिलों में उमड़ती उमंगों और कैफ़ियत का इज़हार है...

'क्या हुआ है, हुआ कुछ नहीं है
बात क्या है पता कुछ नहीं है
मुझसे कोई ख़ता हो गई तो
इसमें मेरी ख़ता कुछ नहीं है
ख़ूबसूरत है तू रुत जवान है
आज मौसम बड़ा बेईमान है'


शहंशाह-ए-तरन्नुम मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में यह नग़्मा रुह को छू लेता है। दरअसल, यह गाना अपने महबूब से क़ुरबत का एहसास दिलाता है। गीतकार आनंद बख़्शी इस गाने में आशिक़ के दिल के नासाज़ हालात को अल्फाज़ में पिरोते हुए लिखते हैं.....

'काली-काली घटा दर रही है
ठंडी आहें हवा भर रही है
सबको क्या-क्या गुमान हो रहे हैं
हर कली हम पे शक कर रही है
फूलों का दिल भी कुछ बदगुमान है'

'ऐ मेरे यार ऐ हुस्न वाले
दिल किया मैंने तेरे हवाले
तेरी मर्ज़ी पे अब बात ठहरी
जीने दे चाहे तू मार डाले
तेरे हाथों में अब मेरी जान है'


हालात कैसे भी हों लेकिन जब मौसम करवटें बदलकर हसीन और दिल फ़रेब होता है तो मुझे वो पहली मुलाक़ात याद आ ही जाती है। मौसम के बदलने पर इस नग़मे को मैं अनायास गुन-गुनाने लगता हूं। यह गीत मेरे ज़हन में यादगार लम्हों की फिर से अक्कासी (प्रतिबिंबित) कर देता है। 

सुनें बेईमान मौसम का ये प्यारा नग़मा..
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