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dosti film song koi jb rah na paye here presented by amarujala kavya 

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

रफी की रूहानी आवाज में दोस्ती का मर्म: कोई जब राह न पाए, मेरे संग आए...

शरद मिश्र-अमर उजाला काव्य डेस्‍क, नई दिल्ली

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दोस्ती इस अनजान दुनिया को जान और पहचान दिलाती है। दोस्ती दुनिया का सबसे अनमोल तोहफा है। हिंदी फिल्मों में दोस्ती के रंग बिखेरे गए हैं। प्रेम, त्याग, साझेदारी, समझदारी  इन सबको दोस्ती अपने में समोए रहती है। 1964 में प्रदर्शित फिल्म दोस्ती का गीत कोई जब राह न पाए...दिल में भावुक एहसास को मचलने के लिए मजबूर कर देता है। इस गीत को सुनकर हर इंसान दोस्ती में आगे बढ़कर एक दूसरे को सहयोग करने की सोचता होगा। गीत का यही एक सच्चा सार है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की स्वर्णिम प्रतिभा ने इस गीत को संगीत से सजाया है। मजरूह सुल्तापुरी ने इस गीत को लिखा है। मोहम्‍मद रफी की रूहानी आवाज ने इसमें गजब की संजीदगी प्रदान की है। 
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गीत की पहली लाइन में ही विश्वास शब्दों के साथ झलकने लगता है 

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