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मेरे अल्फाज़

हमारे पाठक संजय कहते हैं, काश ऐसी रात हो ख़्वाब नहीं ख़्वाबीदा मेरे साथ हो

Dhanawat Sanjay

24 कविताएं

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काश ऐसी रात हो
ख़्वाब नहीं ख़्वाबीदा मेरे साथ हो
कभी ऐसी बात हो
इक चाँद आसमां में दूसरा मेरे पास हो
काश ऐसी भी रात हो

उनसे पूछो जीने का मतलब
जिनकी सारी उमर महबूब के जुल्फ तले गुजरी है
सितारों के गांव में जिनकी रातें
प्रीतम के कंधें पे सर रख कर कटती है
उनसे पूछो जीने का मतलब

वो ही जानते होंगे सही में मोहब्बत का आलम
जिनकी खतायें भी हबीब को अजीज है
जिंदगी उन्ही को रास आ गयी
जिनकी बातों की खुशबू से ही उनको साँस आ गयी
उनसे पूछो जीने का मतलब

काश ऐसी रात हो
ख़्वाब नहीं ख़्वाबीदा मेरे साथ हो
कभी ऐसी भी बात हो
इक चाँद आसमाँ में दूसरा मेरे पास हो
काश ऐसी भी कोई रात हो 

- धनावत संजय 

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