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 chaudhavin ka chand ho is mere aziz nagme in amar ujala kavya 

मेरे अज़ीज़ फिल्मी नग़मे

रुहानियत का लाजवाब अंदाज, चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो...

शरद मिश्र, अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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1960 में रिलीज फिल्म 'चौदहवीं का चांद हो' का गीत चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो...सभी को प्रिय होगा। गीत में प्रेमिका की खूबसूरती को मोतियों जैसे शब्दों के साथ यूं पिरोया गया है कि गीत मन को प्रेम के एक निश्चित मुकाम के लिए ठहराव दे देता है। शकील बदायूंनी ने इस गीत को लिखा है। रवि ने इसमें अपना लोकप्रिय संगीत दिया है। गीतों के सरताज मोहम्मद रफी ने इसमें हमेशा की तरह अपनी कर्णप्रिय आवाज दी है। आगे पढ़ें

पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं में परिपूर्ण रहता है...

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