आनंद बख़्शी के सदाबहार 5 चुनिंदा गीत...

आनंद बख़्शी के सदाबहार 5 चुनिंदा गीत...
                
                                                             
                            अपने अल्फ़ाज़ से झंकृत करने वाले मशहूर गीतकार आनंद बख़्शी फ़ौज में रहने के बावजूद शायर दिल फ़ौजी थे। आम तौर पर माना जाता है कि फ़ौजी थोड़े सख़्त मिज़ाज होते हैं और शेरो-शायरी में उनकी कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं होती। लेकिन, बख़्शी ऐसे नहीं थे। वो नर्म दिल और शब्दों को तराशने वाले फ़नकार थे।
                                                                     
                            

 21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी में पैदा हुए आनंद बख़्शी ने हालात से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने बंदूक में कलम को देखा और शेर-ओ-शायरी के फ़न को ज़िंदा रखा। लोगों के जज़्बातों को सरल ज़बान में बयां करने वाले बख़्शी ने 30 मार्च 2002 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भी उनके बेशक़ीमती गीतों का सरमाया लोगों की ज़बान पर है।

साल 1958 से 2002 के दरम्यान बख़्शी ने करीब 3500 गाने लिखे। बख़्शी के गुलशन में, एक था गुल और एक थी बुलबुल..., मेरे महबूब क़यामत होगी..., चिट्ठी न कोई संदेश..., चांद सी महबूबा हो मेरी..., झिलमिल सितारों का..., परेदेसियों से न अंखियां मिलाना..., सावन का महीना पवन करे सोर..., बाग़ों में बहार है..., मैं शायर तो नहीं..., झ़ूठ बोले कौआ काटे..., कोरा काग़ज़ था ये मन मेरा...,तुझे देखा तो यह जाना सनम..., हमको हमी से चुरा लो..., उड़ जा काले कावां..., इश्क़ बिना क्या जीना यारों... जैसे नायाब गीत हैं। पेश है आनंद बख्शी के कुछ चुनिंदी गीत- 

2001 में आई फिल्म 'गदर एक प्रेम कथा' का गीत- 

उड़ जा काले कावाँ, तेरे मुँह विच खण्ड पावाँ 
ले जा तू संदेशा मेरा, मैं सदके जावाँ

बाग़ों में फिर झूले पड़ गये 
पक गई मिठियाँ अम्बियाँ 
ये छोटी सी ज़िन्दगी के, राता लम्बियाँ लम्बियाँ
ओ घर आ जा परदेसी के तेरी मेरी इक जिन्दड़ी-2

आगे पढ़ें

1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X