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मेरे अल्फाज़

मेरे बग़ैर मेरा हिंदुस्तान नहीं कोई

Zafaruddin Zafar

225 कविताएं

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मेरे बग़ैर मेरा हिंदुस्तान नहीं कोई,
इससे अलग मेरी पहचान नहीं कोई।

लिखीं हैं जब तक सांसें आराम से रहिए,
अपने हैं सारे यहां मेहमान नहीं कोई।

कल जो भी हुआ उसे भूल जाइए,
किसी के बिछुड़ने का फ़रमान नहीं कोई।

आप अपने आप में बदलाव कीजिए,
सोचते हो किसलिए इंसान नहीं कोई।

कोई तो है जो दुनिया को चलाता है,
अगर राम नहीं कोई रहमान नहीं कोई।

वो अच्छा है या बुरा है सब समझते हैं,
बालिग़ हैं सब अक़्ल से नादान नहीं कोई।

इधर जब भी मन करे तुम चले आइए,
"ज़फ़र" मेरे घर पर दरबान नहीं कोई।

-ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र
एफ-413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32
[email protected]

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