आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   ISHARE BHI CHHEEN LENGE

मेरे अल्फाज़

इशारे भी छीन लेंगे

Zafaruddin Zafar

225 कविताएं

353 Views
अभी तो ज़ुबां छीनी है इशारे भी छीन लेंगे,
अगर तुम ना संभले तो इदारे भी छीन लेंगे।

लोकपाल नहीं दिया कोई बात नहीं लेकिन,
ये सोचा नहीं था अन्ना हज़ारे भी छीन लेंगे।

ये कहते हैं जिनके पास सूरज है आजकल,
पक्की बस्तियां छोड़ो, उसारे भी छीन लेंगे।

वो आए नहीं है सिर्फ मुस्तक़बिल बिगाड़ने,
अगर मौक़ा मिला दिन गुज़ारे भी छीन लेंगे।

आज मैं हूं निशाना तो तुम खुश हो लेकिन,
वो मेरे बाद में घर बार तुम्हारे भी छीन लेंगे।

गांव में बारिश नहीं हुई अलग बात है मगर,
वो धमकी दे रहे हैं कि फुहारे भी छीन लेंगे।

दिल में सिर्फ़ मझधार का ख़ौफ मत रखिए,
वो सुना हैं ज़िन्दगी से किनारे भी छीन लेंगे।

सितम का ऐसा ही आलम रहा तो एक दिन,
बदन के ही नहीं, कपड़े उतारे भी छीन लेंगे।

मेरे उपर उनके ज़ुल्म की हद देखिए "ज़फ़र"
वो मेरी उम्मीद के मुझसे शरारे भी छीन लेंगे।

-ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र
एफ-413,
कड़कड़डूमा कोर्ट,
दिल्ली-32
[email protected]

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!