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मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Yusuf Rais

5 कविताएं

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कितना नाशाद हो गया है वो
क्या  मेरे बाद  हो गया है वो।

भूल कर भी उसे न भूल सकूं
इस क़दर याद हो गया है वो।

अब तो आंखें भी अश्क़ बार नहीं 
कितना बरबाद हो गया है वो।

मेरी ग़ुरबत ने जो सिखाया है
क्या सबक याद हो गया है वो।

जाये ऊंची उड़ान पर जाये
अब तो आज़ाद हो गया है वो।

जिस भी पत्थर से चोंट खाई है
मेरी  बुनियाद  हो  गया है  वो।

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