आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Gazal

मेरे अल्फाज़

ग़ज़ल

Yusuf Rais

5 कविताएं

41 Views
कितना नाशाद हो गया है वो
क्या  मेरे बाद  हो गया है वो।

भूल कर भी उसे न भूल सकूं
इस क़दर याद हो गया है वो।

अब तो आंखें भी अश्क़ बार नहीं 
कितना बरबाद हो गया है वो।

मेरी ग़ुरबत ने जो सिखाया है
क्या सबक याद हो गया है वो।

जाये ऊंची उड़ान पर जाये
अब तो आज़ाद हो गया है वो।

जिस भी पत्थर से चोंट खाई है
मेरी  बुनियाद  हो  गया है  वो।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!