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मेरे अल्फाज़

चूम के जल गया

yogesh shing

19 कविताएं

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सांझ सा ढल गया हूं मैं
कि फिर से छल गया हूं मैं
तेरे लब हैं कि हैं शोले
चूम के जल गया हूं मैं


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