आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Amiree gareebi sb hai mati

मेरे अल्फाज़

अमीरी-गरीबी सब है माटी

Yogesh Kumar

8 कविताएं

66 Views
घाट में दो मुरदार थे आये,
अगल-बगल थे दोनों लगाये।
एक अमीर था,एक गरीब था,
दोनों का अपना नसीब था।
पड़े थे दोनों नदी किनारे,
चढ़ा रहे थे लकड़ी सारे।
आँख भी नम थी गम के मारे,
फफक रहे थे जब दुखियारे।
बिलख रहे थे बैठे उधर,
चिता सुलग रही थी जिधर।
मैं भी बैठा देख रहा था,
आँसू जैसे फेखँ रहा था।
पूछ रहा था खुद से रोकर,
सोच रहा था गमगीन होकर।
क्या लड़ना-लड़ाना है,
अंत तो सब वीराना है।
ऊँच-नीच हो जात-पात हो,
बेबसी हो या राज-काज हो।
क्या खोना क्या पाना है,
सबको एक दिन जाना है।
धनी भी एकदम राख हो गया,
निर्धन भी उसी पल खाक हो गया
इतने में तूफान था आया,
आँख खुली कुछ समझ न पाया।
देखा जो उस ओर घुमाकर ,
राख से राख मिली थी जाकर।
मुश्किल ये बड़ा बताना था,
गरीब से अमीर छुड़ाना था।
पहचान बड़ी मुश्किल में आयी,
मिट्टी में मिले थे दोनों भाई।
ये देखा में भी चकराया ,
तब जाके ये समझ में आया।
कुछ भी करे इस दुनिया में,
दर्प न हो किसी क्रिया में।
सबको एक दिन जाना है,
मिट्टी में मिल जाना है।


लेखक -योगेश कुमार

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!