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मेरे अल्फाज़

देश की बेटियां

Yash Prinka

4 कविताएं

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देश की बेटियां कहती हैं !

हमे मत मारो हम नन्ही सी जान हैं!
पढ़ लिख के हमें कुछ बनना हैं,
अपने सपनो को भी पूरा करना हैं!
डॉक्टर, आईएएस बनके दुसरो की भी रक्षा करना हैं!
डर लगता हैं बाहर निकलने से,
कहाँ जाऊ किसपे करू विश्वास कुछ नहीं आता समझ मे!
"बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ " का नारा तो लगाते हो,
लेकिन अपने ही देश मे बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पाते हो !
बच गए एक दिन तो दूसरे दिन शिकार हो जाते हैं,
मेहनत करके आगे बढे लेकिन एक दिन राक्षसों के हाथ आ जाते हैं !
ना डरे लड़की पैदा करने से,
ऐसा माहौल बनाओ ना !
नारा देने से पहले,
देश मे बेटियों की सुरक्षा बढ़ाओ ना!
जब होने लगेगी बेटी सुरक्षित,
कोई भी ना डरेगा बेटी को देश मे लाने से !
बेटी बचाओ सिर्फ नारा हैं,
क्युकि बेटी अपने ही देश मे सुरक्षित ना हैं !
पढ़ लिख के हमें भी बहोत कुछ करना हैं.
ज़ब अपने ही देश में आगे बढ़ने से रोका जाता है !
"भारत मेरी माता है" यह एक सिर्फ एक नारा हैं,
क्युकि माँ बेटी ही अपने देश मे सुरक्षित ना हैं !
इसलिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने
से पहले अपने देश में बेटियों की सुरक्षा बढ़ाओ तो !
जय हिन्द ! जय भारत ! वन्दे मातरम्!
Yash Prinka

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