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मेरे अल्फाज़

इतने दिनों के प्यार के बाद भी

Yaduvansh Pranaya

2 कविताएं

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मैं कितना जानता हूँ तुम्हें
इतने दिनों के प्यार में
क्या जानना बस इतना भर है, कि
तुम्हारा पता, रुचि-अरुचि बस।
या इससे भी कहीं ज्यादा
मुझे जानना चाहिए था
जो सामान्यतः तुम एक पुरुष को
नहीं बता सकती
उसकी बनी हुई मानसिकता के कारण
इतने दिनों के प्यार के बाद भी।
पिछली रात को तुम्हारे बुखार की गर्मी और
चूल्हे के ताप के संघर्ष के बाद भी
मुझे केवल स्वाद ही पता चल सका,
उपहार में लाल चटख रंग की साड़ी
जो तुम पर मुझे अच्छी लगती है
क्या मैं जान पाया इस चटख से इतर भी।
ये रंग और स्वाद जो केवल मेरे लिए थे
क्या मैं जान पाया इससे भी इतर
तुम्हारे बारे में
इतने दिनों के प्यार के बाद भी।

यह कविता स्त्री पुरुष संबंधों में प्रेम के अधिकार पँर है। जिसमे एक पुरुष का दावा हमेशा सर्वोपरि होता है। जबकि उसका दावा अधिकांशतः मिथ्या ही होती है। एक स्त्री मन को जानना सबसे ज्यादा आवश्यक है। वह परोक्ष नही बल्कि प्रत्यक्ष है।
रचनाकार:
यदुवंश प्रणय
संताल परगना महाविद्यालय
दुमका झारखंड
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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