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मेरे अल्फाज़

प्रेम लगन

Wasif Quazi

10 कविताएं

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रहगुज़र मेरी तुम, रहनुमा भी हो 
हो रोशनी मेरी तुम, लालिमा भी हो 

तड़प देती हो इश्क में,ज़ालिमा भी हो 
हक़ जताती हो मुझ पर, प्रेमिका भी हो 

ये प्रेमलगन है दिलों का मिलन तो होगा 
न मिले इस जन्म में, पुनर्जन्म तो होगा 

 तुम्हारे बिना मेरा गुज़ारा कहां है हमदम 
 तेरे दिल के सिवा मेरा ठिकाना कहां है हमदम

 किया है ऐतबार तुम पर, उसे निभाना होगा 
है दिल में मोहब्बत तो, फिर उसे जताना होगा 

मेरी रूह,मेरा अक़्स, मेरी परछाई भी हो 
ख़ुशियों का मौसम तुम, तन्हाई भी हो 

- डॉ वासिफ क़ाज़ी इंदौर

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