आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   kon likhe
kon likhe

मेरे अल्फाज़

छिपे घावों को सरेआम कौन लिखे

VIVEK YADAV

5 कविताएं

224 Views
छिपे घावों को सरेआम कौन लिखे,
तेरे जाने के बाद तेरा नाम कौन लिखे।

जो दिल में था रक्खा छुपाए बरसों से,
अब इक कागज़ पे वो पैगाम कौन लिखे।

इन पहाड़ों में, बहारों में, चाँद तारों में,
कितने रूपों में मिली है तू मुझे कौन लिखे।

कुछ वो लम्हें जो सिर्फ हमने देखे थे,
अब उन लम्हों को मंज़र-ए-आम कौन लिखे।

लोग तन्हाई का कारण जो तलब करते हैं,
क्या कहूं, गीत मेरे हैं मगर ये कौन लिखे।

शोर बरपा है जो हर ओर हंसी की मेरी
इसके पीछे की छिपी सिसकियां अब कौन लिखे।

बीते हैं कई साल तुझको देखे बिना,
मगर तुझ तक जो पहुंच जाए ख़त वो कौन लिखे।

दिल में शिकवे हैं, गिले हैं और शिकायत भी,
कितना लड़ना है मुझे मिलके तुझे, कौन लिखे।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Your Story has been saved!