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मेरे अल्फाज़

दिल में तिरंगा रखता हूँ

Vivek Joshi

1 कविता

37 Views
हर पल शहीदों को याद करता हूँ
खुदा से एक ही फ़रियाद करता हूँ

मुकम्मल कर मुझे वतन परस्ती में
भेज दे मुझको भी वीरों कि बस्ती में

मैं भी तिरंगा अपने दिल में रखता हूँ
वतन के गीत होठों से लिखता हूँ

सोच भी समर्पित शक्ति भी समर्पित
रक्त भी समर्पित देह भी समर्पित

रौशन हुए हैं हम सब वतन की माटी से
क्यों दे रहे हैं उत्तर बंदूक लाठी से

सिखाकर गए जो कबीर और तुलसी
कहाँ प्रेम है अब कहाँ भक्ति उनसी

विचारो कहाँ कमी रह रही है
सरज़मीं कुछ तो कह रही है

फिर से मोहब्बत का सैलाब ला दो
फिर से इबादत की वो आब ला दो

व्यर्थ न जाये हमारी ये पूँजी
ह्रदय में एक विजय नाद गूँजी

भारत के भाल पे चमकेगा सितारा
प्रण है हमारा प्रण है हमारा


-विवेक जोशी "जोश"
Noida

#AzadAlfaz
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