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मेरे अल्फाज़

दिए की ज्योति है दिव्य अनुभूति

Virendra Kumar

41 कविताएं

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दिए की ज्योति है,
दिव्य अनुभूति।
दिए में जब होता है,
बाती और तेल का मेल।
तब जलकर बनती है,
दिए की ज्योति।

दिए की ज्योति
ज्ञान का प्रतीक है,
देती दिव्य अनुभूति।

दिए की ज्योति
सत्य है, शिव है,
सुन्दर है, शुभ है,
यश है , विजय है
सदैव वंदनीय है।

दिए की ज्योति
आशा है, खुशी है,
विश्वास है, दिलों को
देती है सहानुभूति।

दिए की ज्योति
दिए में तेल और
बाती मिल
जलकर, ज्योति बन
तमसो मां ज्योर्तिगमय
असतो मां सदगमय
का संदेश देते ।

अंधकार से प्रकाश
की ओर बढ़ो।
असत्य से सत्य
की ओर ले चलो।

दिए की ज्योति,
आशान्वित करती हैं।
निराशा से आशा की
ओर ले जाती है।

दिए की ज्योति,
श्रृदधा और विश्वास
को जगाती है।
सत्यमेव जयते
को चिरतार्थ करती है।

दिए की ज्योति,
प्रकाश फैलाती है।
अंधेरे से रोशनी की
ओर ले जाती है।

"गुरू जी" दिए की ज्योति,
युगों युगों से अंधकार
से संघर्षरत है।
असत्य से सत्य की ओर
चलने का संदेश देती आई है।

दिए की ज्योति है,
दिव्य अनुभूति।
दिए में जब होता है,
बाती और तेल का मेल।
तब जलकर बनती है,
दिए की ज्योति।

वीरेन्द्र कुमार
नई दिल्ली


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