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मेरे अल्फाज़

मेरे दिल को भा गई

Virendra Kamboj

9 कविताएं

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उनकी पहली अदा
मेरे दिल को भा गई
उनके गांव से जो गुजरा
उनकी याद आ गई
वो छिप-छिपके निहारे थी
सूरत मेरी
मैं रहा बेखबर
कुछ खबर न हुई
मैं जो समझा जरा
वो करीब आ गई
मिली आंखों से आंखें
तो दो से चार हुई
दिल से दिल भी मिला
फिर कब इकरार हुई
सब अचानक हुआ
फिर वो शरमा गई
बातों-बातों में रिश्ता
हुआ जन्मों का
रश्मों बन्धन हुआ
फिर वो मेरे घर आ गई
नई कलियां दिलों में
ऐसी खिलीं
यह पता न चला
कब बहार आ गई
उनकी पहली अदा
मेरे दिल को भा गई
उनके गांव से जो गुजरा
उनकी याद आ गई।

- वीरेन्द्र कुमार स०अ०
बाजपुर, ऊधम सिंह नगर

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