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मेरे अल्फाज़

प्रेयसी

Virender Singh

178 कविताएं

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बीत जाए ना रात प्रेयसी
करो प्यार की बात प्रेयसी
जीवन है दिन चार प्रेयसी
दो दिन जो की बीत गए हैं
बस दो दिन की है बात प्रेयसी

मेरे इस उद्धविध्न मन में
उतारो प्रेम की धार प्रेयसी

मैं प्यासा हूँ बीच ताल में
फँसा हूँ जग के रूप विकराल में
मुझको पार उतार प्रेयसी
अतः आया हूँ तेरे पास प्रेयसी
बीत जाए ना रात प्रेयसी

- विरेन्द्र सिंह

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