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मेरे अल्फाज़

माऊँटेन मैन - 111

Virender Singh

178 कविताएं

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देखो जीवित इंसानों ने
पत्थर को जैसे ओढ़ लिया
पर एक जीवित इन्सान ने
पत्थर का सीना तोड़ दिया
तड़ित पड़ी ,बादल छाया
मौसम ने रौद्र रूप दिखाया
पर साहस को ना डिगा पाया
उफ़न रही नद को जैसे तीर दिया
एक जीवित इन्सान ने
पत्थर का सीना चीर दिया
तोड़ दिया उसका घमण्ड
मस्तक उठाए खड़ा जो भूखण्ड
पाहन से मन को जोड़ लिया
एक जीवित इन्सान ने
पत्थर का सीना तोड़ दिया

- विरेन्द्र सिंह

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