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मेरे अल्फाज़

दर्द का सिकन्दर

Virender Singh

109 कविताएं

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जब दर्द

दिल के अन्दर होता है

तो आँख में भी

समन्दर होता है

ये दर्द

किसी के अन्दर

हो सकता है

कल तक

तेरे अन्दर था

आज मेरे

अन्दर हो सकता है

इस दर्द से

कोई जीत ना पाए

तो ये बवण्डर होता है

यदि जीत ले

दर्द को कोई

तो वो दर्द का

सिकन्दर होता है


विरेन्द्र सिंह
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