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मेरे अल्फाज़

तोड़ दो उस पिंजरे को

Vipin Dilwarya

69 कविताएं

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ना खेत खलियान है
ना कुछ बोया है

बहुत पाया है इस ज़िन्दगी में
और बहुत कुछ खोया है

यूं तो कुछ गम नहीं तेरे जाने का
मगर ना जाने क्यों
तेरे जाने से ये दिल बहुत रोया है


ज़िन्दगी से तू अपनी
बड़ा बेजार हो जाएगा

ये इश्क़ एक जुआं है
मत खेल इसे बर्बाद हो जाएगा

और पता है

बड़ी सदाकत है उसकी
दुआओं में तू आबाद हो जाएगा

तोड़ दो उस पिंजरे को
पंछी है आज़ाद हो जाएगा

By_ Vipin Dilwarya


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