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मेरे अल्फाज़

शायरी संग्रह

Vipin Dilwarya

69 कविताएं

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 तेरे शहर में वो बात कहां
जो बात मेरे गांव की है
और ,
बहुत संभालकर रखी है आज भी
जो पायल तेरे पांव की है


 वो चांद वो तारे , वो बादल वो बारिश ,
वो ईश्वर वो अल्लाह , है क्या
और ,
बड़ी शिद्दत से मैंने मोहब्बत की है तुझे ,
ये तो बता ,
तुझे भी उतनी ही मोहब्बत मुझसे , है क्या


 तेरी आंखें हैं या मैखाना
जब से तेरी आंखो में देखा है ना ,
ये नशा है
जो उतरने का नाम ही नहीं ले रहा..


 वो भगवान है , जानता हूं
मगर पहचानता नहीं हूं , साहब
पहचानता हूं मैं अपने
जिस भगवान को ,
वो है , डॉ कुमार विश्वास और
डॉ राहत इंदौरी साहब


 जंग जीती है हमने बहुत बड़ी - बड़ी
इन तलवार और खंजरों से ,
पर इस मोहब्बत की जंग में हम हार गए
इन कातिल अदाओं और नज़रों से


 वो चांद है
ज़मीन पर उतार कर रख दूंगा
और एक नया आसमां बनाऊंगा
तुझे उसका चांद बनाकर रख दूंगा

फ़लक पर जितने भी सितारे है ना
उन्हें तोड़कर लाऊंगा
और तुझे सजाकर रख़ दूंगा


By Vipin Dilwarya


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