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मेरे अल्फाज़

मोहब्बत नहीं आदत है

Vipin Dilwarya

72 कविताएं

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ये मोहब्बत कोई बुरी चीज़ नहीं
ख़ुदा की दी हुई इबादत है
और जो बदनाम करते है इस
मोहब्बत को,उन्हें मोहब्बत नहीं आदत है ,

भुलाया नहीं जा सकता
मोहब्बत के उन दीवानों को
उन्हीं से तो मोहब्बत आज भी जिंदा है ,

यूं ही नहीं देते मिसाल
लैला मजनू और हीर रांझा की
उन्होंने ही दी मोहब्बत में शहादत है ।

और एक मतला ये है कि..

ये ज़िन्दगी कितने खेल खेलती है
इसमें सुबह होती है तो शाम भी ढलती है
मोहब्बत में कहीं वफा होती है
तो कहीं बेवफाई की शमा भी जलती है

तेरी मोहब्बत कितने रूप
कितने नकाब बदलती है ,
मेरे चेहरे पर नकाब नहीं
मेरी मोहब्बत बेनकाब चलती है ।


By  Vipin Dilwarya



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