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मेरे अल्फाज़

" मां " मदर पोएट्री

Vipin Dilwarya

72 कविताएं

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" मां "

मां महज एक शब्द नहीं ,
इस शब्द में समाया
पूरा संसार है ।

ये चांद , ये सितारे और ये सूरज
सब से मिलकर बना ये आसमां है ,
ये जीव , ये जंतु और ये इंसान
सबके जीवन का आधार बस मां है ।

मां - बाप ही ईश्वर
मां - बाप ही भगवान है ,
मां - बाप के बिना
अधूरा हर इंसान है ।

आज मैं जो कुछ भी हूं
ये बस मां का प्यार है
मां बस मां नहीं ,
मां ही मेरा संसार है ।

सत्यता है बस
मां के प्यार में ,
बाकी सब मिथ्या है
इस संसार में ।

मां के लिए बहुत कुछ
लिखना चाहता हूं ,
सोचता हूं , लिखता हूं
और मिटा देता हूं ,
बस मां लिखकर
आगे निशब्द हो जाता हूं ।



By Vipin Dilwarya


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