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मेरे अल्फाज़

इसमें कुछ खास बात है

Vipin Dilwarya

69 कविताएं

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अक्सर
मिलना और बिछड़ना
ये तो आम बात है ,
लेकिन
आज बिछड़कर याद करना
इसमें कुछ खास बात है ।

यूं महफ़िल में
बोलना - चालना
ये तो आम बात है ,
मगर
आज यूं बेवजह
मुस्कुराकर बात करना
इसमें कुछ खास बात है ।

गलियों से तो हम
उसकी रोज गुजरते थे ,
मगर
आज वो दरवाजे
पर इंतेज़ार करना
इसमें कुछ खास बात है ।

उनके नज़रअंदाज़ करने
से हमें कोई शिकवा नहीं
ये तो आम बात है ,
मगर
आज बार - बार
नज़रें चुराकर नज़रें मिलना
इसमें कुछ खास बात है ।

लाख कोशिश की
मैंने उनसे मिलने की
मगर
आज उनका
घर पर मिलने आना
इसमें कुछ खास बात है ।


By   Vipin Dilwarya


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