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मेरे अल्फाज़

बेरोज़गारी का आलम

Vipin Dilwarya

72 कविताएं

77 Views
स्नातक उत्तीर्ण किया
अाई खुशियों की बहार ,
पल भर की थी ये खुशियां
हमसे पहले स्नातक
अब तक है बेरोजगार ,

दिन - रात मेहनत करते
प्रतिस्पर्धा के लिए
करते रहते नौकरी
निकलने का इंतेज़ार ।

दिन पर दिन बढ़ते जा रहे बेरोजगार
भर्ती नहीं कर रही सरकार ,

रिक्त पदों की संख्या बढ़ रही
बेरोज़गारी निरन्तर बढ़ती जा रही ,

ना जाने कब नोकरी आएगी
होता उस पल का इंतेज़ार ।

चलो तरस आया भइया
बेरोजगारों पर सरकार को ,
विज्ञप्ती हुई अब भर्ती करेंगे
चपरासी और चौकीदार को ,

फॉर्म भरे गए जब साइट जाम हो गई
आधो के फॉर्म भरे गए
और आधे रह गए कतार में ,

हद तो तब हो गई
नौकरियां थी पचास हजार
और फॉर्म भरे गए
बीस करोड़ पचास हजार ,

ऐसे हमारे देश के हालात
कितनी है नौकरियां
और कितने है बेरोजगार ,

चलो ठीक है भइया
मान लिया
नौकरी है कम और
ज्यादा है बेरोजगार ,

तो इसलिए आ गए फॉर्म
बीस करोड़ पचास हजार ,

छटनी हुई जब फार्मों की
दंग रह गए सभी देखकर
बेरोज़गारी के ऐसा आलम ,

पी0 एच0 डी0 धारक
बनने को तैयार है
चपरासी और चौकीदार ,

ऐसे हमारे देश के हालात
कितनी है नौकरियां
और कितने है बेरोजगार ,

अब लग गए दिन रात
खाना पीना छोड़ दिया
बनने को चपरासी और चौकीदार ,

दिन निकलते गए कर रहे थे
पेपर तारीख का इंतेज़ार ,

पेपर के लिए बहुत उत्साहित थे
तैयारी थी बड़ी जोरदार ,

पी0 एच0 डी0 धारक बहुत खुश
हुए अब नौकरी मिल जाएगी
मन ही मन मुस्करा रहा
कि पेपर हो गया बड़ा फर्राटेदार ,

तभी अचानक से
व्हाट्स ऐप पर एक मैसेज आया
उसे देखकर सन्न रह गया ,
पेपर लीक हो गया
रामपुर , इलाहाबाद और हरिद्वार ,

चलो ठीक है भइया
अफवाह थी मान लिया ,

पर भइया उन्हें कोन समझाएगा
जो चले गए कोर्ट कचहरी के द्वार ,

अब करो कोर्ट कचहरी के
फैंसले का इंतेज़ार ,

पी0 एच0 डी0 धारक

अरे हम तो डॉक्टर है
फिर भी बनने को तैयार है
चपरासी और चौकीदार ,

अब करना पड़ेगा इसके लिए भी
कोर्ट की फैंसले का इंतेज़ार ,

अब पढ़े लिखे लड़के
ख़ाली बैठकर मन को समझाते
हुए आपस में करते ऐसी बात

बस एक दो तारीख कोर्ट
कर देगी फैंसला और
भर्ती कर देगी सरकार ,

पर इतना आसान है
क्या नौकरी लेना

तारीख पर तारीख बढ़ती गई
और करते रहे फैंसले का इंतेज़ार ,

अब बात अाई क्या करें
अब बात अाई भइया क्या करें
जो भर्ती करदे पूरी सरकार ,

अब इसके लिए भी हो गया एक और
संघटन प्रदर्शन करने को तैयार ,

वो भी केवल बनने को
चपरासी और चौकीदार ,

सरकार सुनती नहीं
मीडिया दिखाती नहीं
प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार
उन पर लांठिया भांजती पुलिस
और तमाशा देख रही सरकार ,

अब पी0 एच0 डी0 धारक
अपने मन को समझते हुए बोले

अरे हम तो डॉक्टर है
ये हमारे लायक नहीं है
हम बनेंगे 
चपरासी और चौकीदार

और भइया पी0 एच0 डी0 धारक
रोज चुपके से न्यूज़ पेपर चैक कर लेते

और आज भी कर रहे हैं
कोर्ट के फैसले का इंतज़ार

ऐसे हमारे देश के हालात
कितनी है नौकरियां
और कितने है बेरोजगार

आज भी कर रहे हैं कोर्ट के फैसले का
इंतज़ार इंतज़ार इंतज़ार.................



By _ Vipin Dilwarya


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